केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत की संस्कृति और साहित्य कमल की तरह हैं, जिसकी हर क्षेत्रीय भाषा उसकी एक पंखुड़ी को दिखाती है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी पंखुड़ी खो जाए, तो पूरे कमल की सुंदरता कम हो जाती है। श्री शाह ने कहा कि सभी क्षेत्रीय भाषाओं को पूरा सम्मान और गरिमा देते हुए हिंदी को केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए। गृह मंत्री ने आज नवी मुंबई में दो दिन के हिंदी दिवस और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का उद्घाटन किया।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत में कई भाषाएं और बोलियां हैं, लेकिन भारतीय भावना और देश की आवाज़ एक रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता देश की ताकत है और हिंदी अलग-अलग भारतीय भाषाओं के बीच बातचीत का प्रभावशाली पुल बन सकती है, जिससे राष्ट्रीय एकता मज़बूत होगी। उन्होंने कई भाषाओं की महाराष्ट्र की संस्कृति की भी प्रशंसा की।
इस अवसर पर, राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए ग्यारह संस्थाओं और लोगों को सम्मानित किया गया। राजभाषा विभाग की मासिक पत्रिका, राजभाषा भारती के विशेष स्मारक अंक का विमोचन किया गया जो वंदे मातरम पर आधारित है। इस अवसर पर तीन पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। भारती मल्टीलिंगुअल ट्रांसलेशन ऐप का उद्घाटन किया गया और भारतीय भाषाओं के लिए डेसमर्पित देश का पहला डेटा सेंटर, भाषा कुंज भी जारी किया गया।
इस आयोजन में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पांचवीं पीढ़ी के वंशज जॉयदीप चट्टोपाध्याय, कई सांसद, विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद और सीनियर अधिकारी मौजूद रहे।