रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-(डीआरडीओ) तथा उद्योग के बीच साझेदारी भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। श्री सिंह ने नई दिल्ली में डीआरडीओ-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श 2026’ को संबोधित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ ने मिसाइल से लेकर रडार, लड़ाकू विमान से लेकर पनडुब्बियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधार अभूतपूर्व हैं और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल देश में कुछ कल-पुर्जों, मिसाइलों, हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म का विकास करना नहीं है। आत्मनिर्भरता देश के चरित्र और सोच का हिस्सा बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों-एमएसएमई को लगातार गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, नवाचार और वैश्विक मानकों पर ध्यान देना होगा। साथ ही, उन्हें बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी भी बढ़ानी होगी।
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत में रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप की एक नई लहर उभर रही है। उन्होंने कहा कि ये स्टार्टअप न केवल नवाचार कर रहे हैं, बल्कि तेजी से काम करने में सक्षम हैं और रक्षा विनिर्माण के पारंपरिक मॉडल में बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच मिलने से रक्षा क्षेत्र में इन स्टार्टअप के लिए अवसर बढ़े हैं।