रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट बैंक डिपोजिटरी और दूसरी योजनाओं से आने वाला निवेश ‘बहुत मज़बूत’ रहा है। एक साक्षात्कार में श्री मल्होत्रा ने कहा कि यह मज़बूत निवेश भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेटल्स में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है और कम समय में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की क्षमता कोभी सिद्ध करता है।
बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी पर श्री मल्होत्रा ने बताया कि रिज़र्व बैंक के पास नकदी को संभालने के लिए कई उपकरण हैं और वह ज़रूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा कि ऋण वृद्धि बढ़ने के साथ-साथ करेंसी प्रचलन, विदेशी मुद्रा बाज़ार में दखल और बैंकों की कोषीय आवश्यकताओं के ज़रिए समय के साथ कुछ अतिरिक्त नकदी को वापस ले लिया जाएगा।