सितम्बर 16, 2026 2:18 अपराह्न

printer

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए परिपक्व कर नीति पर चर्चा का आह्वान किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि कर से जुड़े प्रस्तावों में देशहित को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर दरों में कमी, छूट या रियायत की मांग से पहले राष्ट्रहित पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वित्त मंत्री आज बेंगलुरु में इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिन के सम्मेलन ‘न्यू एज टैक्सेशन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं।

श्रीमती सीतारामन ने शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और थिंक टैंक से कर नीति पर स्वतंत्र शोध को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध पर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए, ताकि उसमें सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व के विचार-परामर्श में यह भी चर्चा होनी चाहिए कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अगले दो दशक में देश की कर व्यवस्था कैसी हो। उन्होंने कहा कि कर नीति पर शोध में उसके सभी पहलुओं और प्रभावों को देखा जाना चाहिए। साथ ही, राजस्व में कमी होने की स्थिति में उसके विकल्प भी सुझाए जाने चाहिए, ताकि सरकार बेहतर कर नीतियां तैयार कर सके।