बांग्लादेश के प्रमुख मानवाधिकार संगठन, ऐन-ओ-सालिश केंद्र (एएसके) ने देश भर में बाल दुष्कर्म, दुर्व्यवहार और हत्या के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने खुलासा किया है कि इस वर्ष जनवरी से 20 मई के बीच कम से कम 118 बच्चे दुष्कर्म के शिकार हुए।
संगठन के आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि के दौरान 46 अन्य बच्चों के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। संगठन ने बताया कि दुष्कर्म के बाद कम से कम 14 बच्चों की हत्या कर दी गई और तीन अन्य बच्चों की दुष्कर्म के असफल प्रयासों के बाद हत्या कर दी गई। बांग्लादेश के एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र, के अनुसार, शारीरिक हिंसा का शिकार होने के बाद दो बच्चों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
संगठन ने कहा कि पल्लबी में आठ वर्षीय रमीसा अख्तर की हाल ही में हुई हत्या ने बांग्लादेश की बाल संरक्षण प्रणाली की गंभीर कमियों को उजागर किया है। मानवाधिकार संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाएं छिटपुट अपराध नहीं हैं, बल्कि राज्य सुरक्षा तंत्र की विफलताओं और सामाजिक जवाबदेही के व्यापक संकट को दर्शाती हैं।
संगठन ने कहा कि बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 28 और 32 बच्चों के जीवन, सुरक्षा और गरिमा के अधिकारों की गारंटी देते हैं। इसने राष्ट्रीय बाल नीति 2011 का भी हवाला दिया, जो बाल संरक्षण और कल्याण को राज्य का दायित्व मानती है।
ऐन-ओ-सालिश केंद्र ने बताया कि बांग्लादेश, संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता होने के नाते बच्चों के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा, शारीरिक शोषण और दुर्व्यवहार को रोकने के लिए बाध्य है।