भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड- सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग में निहित जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। वे आज एन.ए.बी.एफ.आई.डी. वार्षिक अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। श्री पांडे ने कहा कि पर्याप्त जानकारी के अभाव में कई खुदरा निवेशक फ्यूचर्स और ऑप्शंस-एफ एंड ओ सत्र में तीन से चार साल के कारोबार के बाद भी नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुदरा व्यापारियों के बीच लगातार होता नुकसान चिंता का विषय बना हुआ है।
श्री पांडे ने निवेशकों को यह समझने की आवश्यकता पर जोर दिया कि वास्तव में वे डेरिवेटिव बाजार में खरीदारी करने के लिए तैयार हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभूति बाजार, परिसंपत्ति के संपूर्ण चक्र के विभिन्न चरणों में पूंजी उपलब्ध कराकर भारत की बढ़ती अवसंरचना वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
श्री पांडे ने बताया कि पिछले एक दशक में पूंजी बाजारों ने इक्विटी और ऋण जारी करने के माध्यम से एक सौ लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में पूंजी जुटाने का आंकड़ा लगभग सात लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रिकॉर्ड 80 आईपीओ के माध्यम से लगभग 60 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।