सितम्बर 8, 2026 5:27 अपराह्न

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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से मानवाधिकार अधिवक्‍ता ईमान मजारी-हाजिर को तुरंत रिहा करने की मांग की

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से मानवाधिकार अधिवक्‍ता ईमान मजारी-हाजिर और हादी अली चट्ठा को तुरंत और बिना शर्त रिहा करने की मांग की है।

एमनेस्टी ने कहा है कि दोनों को साइबर अपराध कानूनों के दुरुपयोग के आरोपों के बीच लंबे समय से जेल में रखा गया है।

दोनों वकीलों को इस वर्ष 23 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। इसके अगले दिन इस्लामाबाद की एक अदालत ने उन्हें इलेक्ट्रॉनिक अपराधों से जुड़े कानून के तहत 10 से 17 वर्ष तक की सजा सुनाई थी।

एमनेस्टी के अनुसार, मामला मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। इन पोस्ट में ईमान मजारी-हाजिर ने बलोच और पश्तून कार्यकर्ताओं के प्रति समर्थन जताया और पाकिस्तान की सैन्य नीतियों की आलोचना की थी। हादी अली चट्ठा पर इन पोस्ट को दोबारा साझा करने के आरोप लगाए गए।

एमनेस्टी ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई असामान्य रूप से तेजी से हुई और दोनों वकीलों को गवाहों से जिरह करने तथा सबूत पेश करने के पर्याप्त अवसर नहीं दिए गए।

संगठन ने दोनों वकीलों की जेल में बिगड़ती सेहत पर भी चिंता जताई है।