केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि भारत को विश्व की फार्मेसी की अपनी पहचान से आगे बढ़कर अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों के बल पर विश्व की प्रयोगशाला के रूप में उभरना होगा। वे भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद में स्वास्थ्य सेवा में एआई को बढ़ावा देना विषय पर आयोजित आईआईएमए हेल्थकेयर समिट 2026 को संबोधित कर रही थीं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एआई दवाओं की खोज में तेजी ला सकता है, व्यक्तिगत उपचार को सक्षम बना सकता है और बेहतर स्क्रीनिंग, नैदानिक निर्णय लेने और रोग निगरानी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को अपनाना सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित होना चाहिए, जिसमें रोगी की गोपनीयता के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय हों।
सुश्री पटेल ने कहा कि एआई को मानव नैदानिक निर्णय का पूरक होना चाहिए, न कि उसका स्थान लेना चाहिए। उन्होंने पायलट परियोजनाओं से जनसंख्या स्तर पर कार्यान्वयन की ओर बढ़ने के लिए सरकार, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए उत्कृष्टता केंद्र एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में स्थापित किए गए हैं। उन्होंने सरकार की 5,000 करोड़ रुपये की फार्मा-मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार प्रोत्साहन योजना का भी जिक्र किया। जिसका उद्देश्य अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना और भारत को नवाचार-आधारित विकास की ओर ले जाने में सहयोग करना है।