सितम्बर 14, 2026 9:44 अपराह्न

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ब्रिक्स शिखर सम्‍मेलन के सफल आयोजन पर सदस्य देशों ने की भारत के नेतृत्व की प्रशंसा

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्‍मेलन के सफल समापन के बाद समूह में भारत के नेतृत्व की कई सदस्य देशों ने तारीफ़ की है। भारत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित दो दिन का सम्‍मेलन कल सम्‍पन्‍न हुआ। ब्रिक्‍स में 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्‍पाद का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं।

ब्रिक्‍स देशों ने शनिवार को सम्‍मेलन में एकमत से नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति षी चिनफिंग सहित दुनिया के नेता शामिल हुए। नई दिल्ली घोषणापत्र में भारत की अध्यक्षता की भी तारीफ़ की गई और सम्‍मेलन की मेज़बानी के लिए भारत सरकार और लोगों की प्रशंसा की गई।

दक्षिण अफ्रीका, रूस, चीन, ब्राज़ील और संयुक्त अरब अमीरात ने समूह के अंदर सहयोग को मज़बूत करने और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत के प्रयासों का स्वागत किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्‍ट्रपति सिरिल रामफोसा ने ब्रिक्‍स अध्‍यक्ष के तौर पर भारत के नेतृत्‍व की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली ने बेहद सफल सम्‍मेलन आयोजित किया और आम सहमति पर पहुंचने में संदेह के बावजूद सदस्य देशों को नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाने के लिए एक साथ लाने में कामयाब रहा। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र को सफलतापूर्वक अपनाना सभी ब्रिक्‍स सदस्यों की मिली-जुली कोशिशों का परिणाम था। उन्होंने भारत को उसकी संगठन शक्ति और नेतृत्‍व के लिए बधाई दी।

चीन की सरकारी मीडिया और नेताओं ने नई दिल्ली घोषणापत्र को ग्लोबल साउथ देशों के बीच बेहतर गुणवत्‍ता के सहयोग और एकजुटता के लिए सकारात्‍मक कदम बताया।

रूस ने ब्रिक्‍स सहयोगी देशों के साथ समावेशी, विकास-उन्‍मुखी साझेदारी के लिए मॉस्को के समर्पण की फिर से पुष्टि की। रूस के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में, बहुध्रुवीय व्‍यवस्‍था को मज़बूत करने, संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर के उद्देश्‍य और सिद्धांतों सहित अंतरराष्‍ट्रीय कानून को पूरी तरह से बनाए रखने के लिए मॉस्को की प्रतिबद्धता दोहराई।

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने कहा कि ब्रिक्‍स नई दिल्ली घोषणापत्र ग्लोबल साउथ की मुख्य ज़रूरतों को पूरा करता है और साझा ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए व्‍यावहारिक रूपरेखा देता है। एक न्यूज़ एजेंसी के साथ खास बातचीत में, श्री लुबेटकिन ने कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता , शांति, भौगोलिक-राजनीतिक दबाव, व्‍यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे अलग-अलग इलाकों के देशों पर असर डालते हैं, जिससे ब्रिक्‍स सशिखर सम्‍मेलन के नतीजे समूह से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में हिस्सा लेने वाले नेताओं की प्राथमिकताओं को कामयाबी से शामिल किया गया और इसे आम चुनौतियों से निपटने के लिए उपयोगी और व्‍यावहारिक रूपरेखा बताया।

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरश ने भारत की ब्रिक्‍स अध्‍यक्षता की तारीफ़ की और चौथी बार ब्रिक्‍स की अध्‍यक्षता करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी नई दिल्ली घोषणापत्र की तारीफ़ की। सोशल मीडिया पोस्ट में, विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनाम घेब्रियसस ने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, मज़बूत हेल्थ सिस्टम, पैंडेमिक एग्रीमेंट के पैथोजन एक्सेस और लाभ साझा करने पर बातचीत के कामयाब नतीजे के लिए प्रतिबद्धता की तारीफ़ की। श्री घेब्रियसस ने टीबी को खत्म करने, हेल्थ वर्कफोर्स को मज़बूत करने, डिजिटल हेल्थ, पारंपरिक मेडिसिन को जोड़ने और सभी के लिए स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ब्रिक्‍स देशों की कोशिशों की भी तारीफ़ की। उन्होंने सम्‍मेलन में गर्मजोशी से स्वागत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार प्रकट किया।

अमरीका के एक विश्लेषक ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को बहुत सफल बताया है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणा-पत्र अलग-अलग विचारों वाले देशों के बीच आम सहमति बनाने की भारत की क्षमता को दर्शाता है। अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि यह घोषणा-पत्र भारत की बढ़ती वैश्विक समन्वय क्षमता और ब्रिक्स की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता प्रकट की गई है, और कहा गया है कि वे वैश्विक व्‍यापार को बिगाड़ते हैं और विश्‍व व्‍यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसमें आतंकवाद, टकराव की रोकथाम और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर सहयोग की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया है।

श्री कुगेलमैन ने कहा कि घोषणापत्र ब्रिक्‍स देशों के बीच व्‍यापार को बढ़ावा देने और पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले आर्थिक और वित्‍तीय संस्थानों के विकल्प के तौर पर ग्रुसमूह को मज़बूत करने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्‍स के अंदर ज़्यादा व्‍यापार के लिए ज़ोर देना, ट्रंप एप्रशासन की ट्रेड पॉलिसी से जुड़े टैरिफ और प्रतिबंधों का सामना कर रही अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्‍वपूर्ण उपाय करने की समूह की क्षमता को दिखाता है। अपनी एक साल की अध्‍यक्षता के दौरान, भारत ने आर्थिक और विकास सहयोग को मज़बूत करने, विकासशील देशों के हितों को बढ़ावा देने और वैश्विक मामलों में ग्लोबल साउथ को ज़्यादा आवाज़ देने पर ध्‍यान दिया।