गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि प्रयोगशाला में उत्पादित हीरों का संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र और विनिर्माण श्रृंखला पूरी तरह से भारतीय हाथों में रहे। उन्होंने मुंबई में आयोजित 52वें भारत रत्न और आभूषण पुरस्कार समारोह में कहा कि प्रयोगशाला में उत्पादित हीरों से इसके व्यापार का स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक विशाल अवसर बताया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला में उत्पादित हीरों का बाजार मात्रा के लिहाज से वर्तमान हीरा बाजार से लगभग 50 गुना बड़ा होने की उम्मीद है।
श्री शाह ने कहा कि भारत में इस अवसर का लाभ उठाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा, क्षमताएं, पूंजी और उद्यमशीलता प्रतिभा मौजूद है। उन्होंने उद्योग से विनिर्माण मशीनरी, हीरा उत्पादन, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विश्व भर के शहरों में भारतीय कंपनियों के शोरूम स्थापित करने सहित पूरी मूल्य श्रृंखला में क्षमताएं विकसित करने का आग्रह किया।
इससे पहले, गृह मंत्री ने मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में ‘श्री गणेश ज्ञानरात्रि’ शीर्षक से पांडुलिपियों की एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, श्री शाह ने कहा कि भारत की समृद्ध और जीवंत ज्ञान परंपरा है, जिससे पूरे विश्व को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान की इस चिरस्थायी विरासत से देश, सदियों के विदेशी आक्रमणों के बावजूद अपनी पहचान और सभ्यतागत निरंतरता बनाए रखा है। श्री शाह ने कहा कि भारत की आत्मा कभी गुलाम नहीं हो सकती क्योंकि इसके इतिहास, भाषा, संस्कृति, अभिलेखागार और परंपराओं में इसकी स्मृति बसी हुई है। उन्होंने एशियाटिक सोसाइटी से आग्रह किया कि वह आधुनिक तकनीक का उपयोग करके अपने ज्ञान के विशाल भंडार को देश भर के लोगों तक पहुंचाए। केंद्रीय मंत्री ने पुस्तकालय का दौरा भी किया और सोसाइटी की पांडुलिपि संरक्षण प्रयोगशाला में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया।
इस कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।