विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच (डब्ल्यू.सी.ई.एफ.) 2026 का 10वां संस्करण गुजरात में गांधीनगर के महात्मा मंदिर में शुरू हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसका संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। ये सम्मेलन भारत में पहली बार आयोजित हो रहा है। 65 से अधिक देशों के दो हजार से अधिक हितधारक इसमें भाग ले रहे हैं। इसका विषय है- चक्रीय अर्थव्यवस्था-जन और समृद्धि के लिए परिवर्तन।
डब्ल्यूसीईएफ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत में फिनलैंड के राजदूत मिको किविकोस्की ने कहा कि परिपत्र अर्थव्यवस्था केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है और इसे सिर्फ अपशिष्ट प्रबंधन तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत जैसे उभरते देशों की परिपत्र अर्थव्यवस्था के ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय मंत्री, भूपेंद्र यादव ने सतत विकास ढांचे में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों को समाहित करने की भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने, पुनर्उपयोग, मरम्मत और संरक्षण की अपनी प्राचीन पद्धतियों को समकालीन नीतियों में आधुनिक रूप दिया है। उन्होंने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व-ई.पी.आर. विनियमों और मिशन लाइफ जैसी पहलों को चक्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अगस्त 2026 तक, ई.पी.आर. के अंतर्गत 83 हज़ार से अधिक उत्पादक और 4 हज़ार 802 पुनर्चक्रणकर्ता पंजीकृत हैं। ये लगभग 482 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का प्रसंस्करण कर रहे हैं। ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा, भारत-ईयू संयुक्त ढांचा और मिशन लाइफ जैसी वैश्विक पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चक्रीय अर्थव्यवस्था की शुरुआत भारत से ही होनी चाहिए।
इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री, भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विकास, पारिस्थितिकी, समृद्धि और स्थिरता साथ-साथ चलनी चाहिए। उन्होंने चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को भारत के सतत विकास का मूल आधार बताया।
इस विश्व स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फिनिश इनोवेशन फंड सिट्रा और गुजरात सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इस दौरान दो दिन में, 4 पूर्ण सत्र और 16 विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में, ए. आई., हरित ऊर्जा, सतत वित्त, शासन और स्टार्टअप ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद, 17 और 18 सितंबर को भी सत्र आयोजित किए जाएंगे।