सामाजिक सुधार आंदोलन के महान व्यक्तित्व ईश्वर चंद्र विद्यासागर को उनकी 207वीं जयंती पर आज पूरा देश श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के बीरसिंह में 26 सितंबर 1820 को जन्मे विद्यासागर ने अपना जीवन शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए समर्पित कर दिया था।
वे महिलाओं की शिक्षा के प्रबल समर्थक थे और हिंदू विधवा पुनर्विवाह के अभियान में उन्होंने ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिसके फलस्वरूप 1856 में हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ।
उन्होंने बाल विवाह और बहुविवाह के विरुद्ध भी कार्य किया और लड़कियों के लिए विद्यालय स्थापित करने में सहायता करके उनकी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
एक शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने शिक्षा के आधुनिकीकरण और बंगाली गद्य को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रचना ‘वर्ण परिचय’ बंगाली बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिक ग्रंथ बन गई।