भारत और उज्बेकिस्तान ने आपसी संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढाने का फैसला किया है। उज्बेकिस्तान भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए रूपरेखा तय करने और दुर्लभ खनिजों के खनन स्थलों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुआ है।
दोनों देशों ने आज खनन, आयुर्वेद, पर्यटन, आर्थिक और वित्तीय संवाद, व्यापक और रणनीतिक साझेदारी, उच्च शिक्षा और पर्यावरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
हमारे संवाददाता ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शफ़कत मिर्जियोयेफ के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय करने पर सहमत हुए। यह वर्तमान व्यापार का पांच गुणा है।
बैठक के दौरान व्यापार और निवेश, बुनियादी ढांचा, दुर्लभ खनिज, खनन, रक्षा और संरक्षा, नवाचार कृषि, औषध, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, यूपीआई और शिक्षा सहित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर चर्चा हुई। उज्बेकिस्तान में पढाई के लिए जाने वाले देश के युवाओं के हित में और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के लिए कई उपायों पर चर्चा हुई। ताशकंद विश्वविद्यालय में संस्कृत की चेयर स्थापित करने के साथ हिन्दी के लिए लाल बहादुर शास्त्री के नाम से सौ छात्रवृत्तियों की घोषणा की गई।
भारत ने अराल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए दस लाख डॉलर का अनुदान देने का फैसला किया है। उज्बेकिस्तान में मर्चेंट भुगतान के लिए भारत के यूपीआई ऐप को राष्ट्रीय क्यूाअर- यूजेडक्यूआर को स्कैन करने में सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण वाणिज्यिक समझौता किया गया।
संयुक्त घोषणा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद और अलगाववाद से निपटने के लिए शून्य सहिष्णुता की नीति पर अमल करते हैं।श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग पूंजी तक सीमित नहीं होगा बल्कि इसे शहर और राज्य स्तर की साझेदारी तक बढाया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश खेलों और हिन्दी को प्रोत्साहन देने के क्षेत्र में सहयोग के लिए मिलकर काम करेंगे।उज्बेकिस्तान में फयाज़ टेपा और कारा टेपा बौद्ध स्थलों के संरक्षण के सहमति-पत्र पर भी हस्ताक्षर हुए।