र्किगिस्तान के बिश्केक में आयोजित 26वां शंघाई सहयोग संगठन – एससीओ शिखर सम्मेलन 13 प्रमुख बिन्दुओं पर सहमति के साथ संपन्न हुआ। ये निर्णय आतंकवाद-रोधी उपायों, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और डिजिटल सहयोग से संबंधित हैं।
शिखर सम्मेलन में एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक बिश्केक घोषणापत्र को अपनाया गया। इसके अलावा, चार समझौता ज्ञापनों और 20 से अधिक निर्णयों को भी मंजूरी दी गई।
एक महत्वपूर्ण निर्णय अंग्रेजी को एससीओ की आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना था। नेताओं ने सुरक्षा से जुड़े खतरों का मुकाबला करने के लिए एक सार्वभौमिक केंद्र स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
ये उपाय आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य अंतरराष्ट्रीय खतरों के खिलाफ एससीओ सहयोग को मजबूत करेंगे। इनसे सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी बेहतर होगा।
कई निर्णय मादक पदार्थों की तस्करी और कृत्रिम दवाओं से निपटने पर केंद्रित हैं। इनमें कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय और वर्ष 2030 तक मादक पदार्थों की लत से निपटने के लिए एक सहयोग कार्यक्रम शामिल है। ये उपाय सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी और नार्को-आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रयासों का समर्थन करते हैं।
एससीओ सदस्यों ने ऊर्जा संरक्षण और दक्षता पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने पर एक ज्ञापन भी अपनाया। ये उपाय भारत के ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु-लचीले विकास लक्ष्यों का समर्थन करते हैं।
शिखर सम्मेलन में आपदा से प्रभावित देशों को सहायता देने पर एक वक्तव्य भी अपनाया गया। यह आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता में सहयोग को मजबूत करेगा।
सदस्यों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस कदम से भारत को अपनी डिजिटल और एआई विशेषज्ञता साझा करने तथा प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन में सूचना सहयोग पर भी एक समझौता किया गया। इससे संस्थागत आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय मीडिया जगत में भारत की भागीदारी को मजबूत करने में मदद करेगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन निर्णयों से भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए रणनीतिक मंच प्राप्त होगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपने सम्बोधन के दौरान अगले 25 वर्षों के लिए एक रूपरेखा का आह्वान किया। उन्होंने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों के क्षेत्रों में ठोस परिणामों की आवश्यकता पर बल दिया।
दो दिवसीय एससी शिखर सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित किया गया था।