उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर श्री राधाकृष्णन ने कहा कि ये खेल साहस, दृढ़ संकल्प, करुणा और जीवन के अनमोल उपहार का उत्सव हैं। उन्होंने अंगदान को महादान बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से किसी के जाने के बाद भी दूसरों के जीवन में आशा बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से लगातार अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, जिससे देश में अंगदान अभियान को काफी प्रोत्साहन मिला है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये खेल अंग प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों के हौसले और संघर्ष को दर्शाते हैं। साथ ही आधुनिक चिकित्सा की जीवन बदलने की क्षमता को भी सामने लाते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के साहस, अनुशासन और खेल भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि इनकी उपलब्धियां अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे लोगों में आशा जगाती हैं।
श्री राधाकृष्णन ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे जुड़ी गलत धारणाओं और भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अंगदान के बारे में सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने और अपनी इच्छा परिवार के सदस्यों को बताने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता और आपसी संवेदना का प्रतीक बनना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को नया जीवन मिल सके।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विश्व रिकॉर्ड बनाने के प्रयास को भी देखा। इसमें अंग प्रत्यारोपण करा चुके पांच सौ 70 लोगों और अंगदाताओं ने एक साथ ताड़ासन किया। इसके लिए आयोजकों को ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नई दिल्ली’ की ओर से सबसे बड़ी संख्या में अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों और अंगदाताओं द्वारा एक साथ ताड़ासन करने का प्रमाण पत्र दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने ‘जिंदगी दोबारा’ कैलेंडर जारी किया और जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित विश्व प्रत्यारोपण खेल 2025 के पदक विजेताओं को सम्मानित किया। उन्होंने उपस्थित लोगों के साथ अंगदान की शपथ ली और कबड्डी, टेबल टेनिस तथा बैडमिंटन के प्रदर्शनी मुकाबले भी देखे। इस अवसर पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव भी उपस्थित थे।