अप्रैल 25, 2026 3:56 अपराह्न

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने विद्यार्थियों से आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक आचरण और आजीवन सीखने का आह्वान किया

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज विद्यार्थियों से आलोचनात्मक चिंतन करने, नैतिक रूप से कार्य करने और आजीवन सीखने की प्रक्रिया जारी रखने का आहवान किया। उन्‍होंने, मुख्‍य अतिथि के रूप में जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

श्री राधाकृष्‍णन ने विद्यार्थियों को लचीलापन बनाए रखने, असफलताओं से सीखने और मूल्‍यों में विश्‍वास करने के लिए प्रेरित किया। उन्‍होंने कहा कि सहानुभूति के बिना उत्‍कृष्‍टता और विनम्रता के बिना उपलब्धि अधूरी है। 

उपराष्‍ट्रपति ने स्‍नातक ‍विद्यार्थियों से समाज को अर्थपूर्ण योगदान करने का आग्रह किया। उन्होंने करुणा, विविधता के प्रति सम्मान और व्यापक भलाई के प्रति वचनबद्धता पर बल दिया।

उपराष्‍ट्रपति ने विद्यार्थियों का मादक पदार्थों से दूरी बनाये रखने और सोशल मीडिया का जिम्‍मेदारी और रचनात्‍मक तरीके से इस्‍तेमाल करने की भी सलाह दी।

शिक्षा के सही उद्देश्‍य का उल्‍लेख करते हुए उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि ज्ञान का इस्‍तेमाल समाज की भलाई, नवाचार और नैतिक आचरण के लिए किया जाना चाहिए। आत्‍मनिर्भर भारत और विकसित भारत के दृष्टिकोण का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने विद्यार्थियों को रोजगार सृजक, नवोन्‍मेषक और राष्‍ट्र निर्माता बनने के लिए प्रेरित किया।

महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए उन्‍होंने महिला स्‍नातकों की उपलब्धियों पर गर्व व्‍यक्‍त किया।इस अवसर पर राजस्‍थान के राज्‍यपाल हरिभाऊ किशन राव बागडे और उप-मुख्‍यमंत्री प्रेम चंद बैरवा उपस्थित थे।