उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से स्वस्थ और अनुशासित जीवन जीने, नशीले पदार्थों से दूर रहने और नशा मुक्त भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया है। गुवाहाटी में श्रीमंत शंकरदेव यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने युवाओं से सोशल मीडिया का रचनात्मक इस्तेमाल करने और इसमें अपना अधिक समय न देने की सलाह दी।
इससे पहले, गीतानगर कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह में उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से जिम्मेदार फैसले लेने और अपने समय, स्वास्थ्य तथा भविष्य की रक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसर युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएंगे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और चरित्र निर्माण देश की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों को केवल रोजगार के लिए तैयार करने के बजाय लोकतंत्र और समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक बनाने पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती उपलब्धियों को नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि महिलाओं को उचित शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना ही सच्चा सशक्तीकरण है।
असम के विकास का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था 45 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि 2021-22 से 2024-25 के बीच प्रति व्यक्ति आय में 54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूर्वोत्तर सहित हर राज्य और क्षेत्र का समावेशी विकास जरूरी है।