केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्यों की भागीदारी बढ़ाकर कृषि विज्ञान केंद्रों को मजबूत करने की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य रूप से मार्च 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 कृषि विज्ञान केंद्रों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई। श्री चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और समय पर सहयोग बेहद जरूरी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के कायाकल्प के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त जनशक्ति और जिला-स्तरीय कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।
उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केंद्र तथा अन्य हितधारकों के साथ तालमेल बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि कृषि विज्ञान केंद्र कृषि तकनीक के प्रसार, कौशल विकास, नवाचार और ग्रामीण उद्यमिता के प्रभावी मंच के रूप में उभर सकें। राज्यों से इन केन्द्रों में खाली पड़े पदों को समय पर भरने को कहा गया है, ताकि इनका कामकाज सुचारू रूप से चल सके। इसके साथ ही, दिसंबर 2028 तक सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में ‘इंक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र’ स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत केवीके को कृषि आधारित उद्योगों, तकनीकी संस्थानों और स्थानीय कृषि संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है। बैठक में ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। राज्यों से कहा गया है कि वे इस योजना के अंतर्गत जिला-विशिष्ट कार्ययोजनाओं को लागू करने के लिए केवीके को पर्याप्त धन उपलब्ध कराएं।