विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने देश के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप तंत्र को महानगरों से आगे ले जाने और विज्ञान, स्टार्टअप तथा उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाने पर बल दिया है। कोलकाता में राइज कॉन्क्लेव के उद्घाटन में डॉ. सिंह ने कहा कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में नवाचार की क्षमता को पहचानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के 50 से 60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप महानगरों से बाहर हैं। इनमें लगभग 15 प्रतिशत उद्यम दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों के युवाओं द्वारा संचालित हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए नए अवसर खोले हैं। इससे स्टार्टअप और उद्योगों को देश के तकनीकी विकास में योगदान देने का नया अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टार्टअप इंडिया-स्टैंडअप इंडिया पहल के अंतर्गत देश का स्टार्टअप तंत्र तेजी से बढ़ा है और स्टार्टअप की संख्या 350 से बढ़कर करीब 2 लाख 40 हजार हो गई है। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के लिए वैज्ञानिक विरासत को स्वदेशी तकनीक, उद्यमिता, आधुनिक विनिर्माण और मजबूत औद्योगिक भागीदारी से जोड़ना होगा। उन्होंने उद्योग जगत से भारतीय प्रयोगशालाओं में विकसित स्वदेशी तकनीकों को अपनाने, सहयोग देने, वित्त उपलब्ध कराने और उनका व्यावसायीकरण करने का आह्वान किया।