मई 31, 2026 9:00 अपराह्न

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संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सहायता की स्थिति को बताया नाजुक

म्यांमा से बड़े पैमाने पर हुए पलायन के लगभग एक दशक बाद बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए चल रही सहायता एक नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने “नाजुक चरण” बताया है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय अनुदान में कमी आई है, शिविरों की स्थिति बिगड़ती जा रही है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

2026 की संयुक्त सहायता योजना प्रस्तुत करते हुए, संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहायता साझेदारों ने लगभग 15 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों और मेजबान समुदायों के सदस्यों की सहायता के लिए 71 करोड़ अमरीकी डॉलर से अधिक की सहायता राशि की अपील की है।

बांग्लादेश में आयोग के प्रतिनिधि, इवो फ्रीजेन ने कहा कि म्यांमा में निरंतर अस्थिरता और शिविरों की बिगड़ती स्थिति ने मानवीय स्थिति को और भी नाजुक बना दिया है। लगभग 13 लाख राज्यविहीन रोहिंग्या अभी भी बांग्लादेश में रह रहे हैं और उनके म्यांमा लौटने की संभावनाएं बहुत कम हैं। मानवीय सहायता एजेंसियों का कहना है कि शिविरों के अंदर आजीविका के अवसर  भी बेहद सीमित हैं। आयोग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष केवल 23 प्रतिशत शरणार्थी परिवारों ने नकद-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से आय अर्जित की, जबकि 35 प्रतिशत परिवारों के पास आय का कोई स्रोत नहीं था और वे पूरी तरह से मानवीय सहायता पर निर्भर थे।

महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, दिव्‍यांग व्यक्ति और 2024 की शुरुआत से लगभग 150 हजार नए शरणार्थी, वित्तीय सहायता की कमी से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें से कई नए शरणार्थी अभी भी भीड़भाड़ वाले शिविरों में पर्याप्त आश्रय के बिना रह रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमा में रोहिंग्याओं की स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की आवश्यकता पर जोर दिया है, और कहा है कि इस दिशा में हुइ्र प्रगति सीमित है।