जनजातीय कार्य मंत्रालय कल से 26 अगस्त तक कर्नाटक के मैसूरु में जनजातीय भाषाओं और संग्रहालयों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। यह सम्मेलन जनजातीय भाषाओं के प्रलेखन, संरक्षण और पुनरुद्धार पर राष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देगा। इससे देश भर में जनजातीय संग्रहालयों और जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को मजबूती मिलेगी। यह सम्मेलन प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के रोडमैप को आगे बढ़ाता है, जिसके अंतर्गत भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को पुनर्जीवित करना और यह सुनिश्चित करना कि कोई भी समुदाय पीछे न छूटे, समावेशी राष्ट्रीय विकास के प्रमुख स्तंभ हैं। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके करेंगे।
इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कर्नाटक की जनजातीय भाषाओं के लिए प्राइमर्स का विमोचन किया जाएगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होंगे। एक नए चैटबॉट का शुभारंभ किया जाएगा और आदि वाणी प्लेटफॉर्म को अपडेट किया जाएगा।