सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी जमानतदारों को लेकर चिंताओं के बीच मादक औषधि और मनोरोगी पदार्थ अधिनियम से संबंधित मामलों में आरोपी विदेशी नागरिकों के लिए जमानत की शर्तें कठोर करने का आदेश दिया है। इस संबंध में कई निर्देश जारी करते हुए न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि जमानत पर रिहा किए गए विदेशी नागरिकों को अपने पासपोर्ट संबंधित न्यायालयों में जमा करने होंगे और वे पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर यात्रा नहीं कर सकेंगे। न्यायालय ने कहा कि ऐसे आरोपियों को रिहाई के एक सप्ताह के भीतर विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा। न्यायालय ने कहा कि जांच के दौरान आरोपी के आवासीय पते और अन्य संपर्क जानकारी का भारत में सत्यापन होने के बावजूद जमानत आदेश जारी होने के तीन दिनों के भीतर इसका वास्तविक सत्यापन दोबारा किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को भारत में अपनी आय या धन के स्रोत और बैंक खाते के विवरण के संबंध में हलफनामा भी देना होगा।
न्यायालय ने अधिकारियों को विदेशी आरोपियों और उनके ज़मानतदारों का विवरण रखने से संबंधित एक केंद्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ज़मानतदार के फर्जी पाए जाने पर ज़मानतदारों के सत्यापन में शामिल केंद्रीय और राज्य स्तर के अधिकारियों को विभागीय जांच का सामना करना पड़ सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय चिडीबेरे किंग्सले नौचारा नामक विदेशी नागरिक से जुड़े एनडीपीएस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसे जमानत मिल गई थी और बाद में वह फरार हो गया था।