पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना की ओर बढ़ते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने में समुद्री क्षेत्र एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा। नई दिल्ली स्थित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में समुद्री शिक्षा पर एक संगोष्ठी समारोह को संबोधित करते हुए श्री सोनोवाल ने कहा कि भारत की समुद्री परिकल्पना सागर और महासंघ सिद्धांतों द्वारा निर्देशित है, जो क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साझा समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और 111 राष्ट्रीय जलमार्गों वाले देश के लिए समुद्री क्षेत्र को मजबूत करना न केवल एक अवसर है, बल्कि एक राष्ट्रीय अनिवार्यता भी है। श्री सोनोवाल ने कहा कि एक एकीकृत और समन्वित ढांचा भारत के समुद्री परिवर्तन को गति दे रहा है, जिसमें स्थिरता एक केंद्रीय स्तंभ है।
उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री कार्यबल में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और देश अब वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन प्रदाताओं में शामिल हैं, जो वैश्विक समुद्री कार्यबल में लगभग 12 प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान दो समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ, जिनमें से एक दिल्ली विश्वविद्यालय और विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली के बीच समुद्री क्षमता निर्माण और अकादमिक आदान-प्रदान के लिए और दूसरा अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के बीच सार्वजनिक नीति अनुसंधान और प्रशिक्षण में संयुक्त कार्यक्रमों के लिए था।