लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा हो रही है। इन तीनों विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। तीनों विधेयकों पर आज दोपहर मतदान होना है।
चर्चा में भाग लेते हुए डीएमके सांसद के. कनिमोझी ने विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि केंद्र ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को कल रात अधिसूचित कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है, ऐसे में इसकी क्या आवश्यकता है। सुश्री कनिमोझी ने आरोप लगाया कि सरकार ने तमिलनाडु और अन्य राज्यों में चुनावों को बाधित करने के लिए इस विशेष सत्र में तीनों विधेयक पेश किए हैं। उन्होंने दावा किया कि ये विधेयक महिलाओं के आरक्षण के समर्थन का दिखावा करते हैं, वास्तव में ये भारत के संघीय ढांचे के खिलाफ हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि सरकार को विश्वास है कि परिसीमन विधेयक निष्पक्ष है, तो इसे तमिलनाडु विधानसभा में क्यों नहीं पेश किया जा रहा है?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि देश महिला आरक्षण के पक्ष में लगभग राजनीतिक सहमति की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि महिला आरक्षण का कार्यान्वयन संसद के विस्तार, 2011 की जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इसे परिसीमन से जोड़ना भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं को देश के इतिहास की जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बंधक बनाने जैसा है। श्री थरूर ने परिसीमन विधेयक को राजनीतिक सत्ता में एक बड़ा बदलाव बताया और किसी भी निर्णय से पहले व्यापक चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन उन राज्यों की आवाज़ को और भी दबा देगा जो संसाधनों का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदान करते हैं।
वाई.एस.आर.सी.पी. सांसद पीवी मिधुन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला सशक्तिकरण की समर्थक रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया विपक्ष को कुचलने का उपकरण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया होनी चाहिए।
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि ये तीनों विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के दृष्टिकोण को पूरा करने के उद्देश्य से लाए गए हैं। यह विधेयक देश की महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर सामाजिक बदलाव लाने वाले किसी भी कार्य का समर्थन न करने का आरोप लगाया।
तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के दौरान संसद के विशेष सत्र पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन इसे संसद की वर्तमान क्षमता के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
टीडीपी सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलू ने विधेयकों के समर्थन में कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने कल ही लोकसभा में राज्यों के लिए 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि पर स्पष्टीकरण दे दिया है।
समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए बालिकाओं की शिक्षा पर काम करना चाहिए। उन्होंने पूछा कि उत्तर प्रदेश में कई स्कूल क्यों बंद हैं?
शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने मांग की कि महिला आरक्षण को परिसीमन के बिना संसद की वर्तमान क्षमता के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का यह ऐतिहासिक अवसर है।
चर्चा जारी है।