जुलाई 27, 2026 2:04 अपराह्न

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हेपेटाइटिस से निपटने के लिए देश कर रहा है व्यवस्थित रूप से प्रयास

भारत हेपेटाइटिस से निपटने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। राष्‍ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक इस बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य प्रणाली दृष्टिकोण अपनाया गया है और संक्रमण की रोकथाम तथा प्रभावित लोगों को मुफ्त निदान और उपचार के लिए विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के साथ एकीकृत किया गया है।

हेपेटाइटिस यकृत की सूजन है जो हेपेटाइटिस वायरस, अन्य संक्रमण, शराब और नशीली दवाओं जैसे विषाक्त पदार्थों के कारण होती है साथ ही यह ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण भी होती है- जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के स्‍वस्‍थ हिस्‍सों को प्रभावित करती है। हेपेटाइटिस के पांच मुख्य वायरस ए, बी, सी, डी और ई हैं, जिनमें हेपेटाइटिस बी और सी, सिरोसिस और यकृत कैंसर के सामान्‍य कारण हैं। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप स्क्रीनिंग और उपचार सेवाएं प्रदान करने के लिए 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत जागरुकता, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार और जरूरतमंद लोगों के लिए निदान और उपचार सुनिश्चित करने पर ध्‍यान केंद्रित किया जा रहा है। हेपेटाइटिस बी और सी के लिए निःशुल्क निदान और दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकार ने हेपेटाइटिस की रोकथाम और नियंत्रण को कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकृत किया है। देशभर में हेपेटाइटिस बी और सी के लिए निःशुल्क परीक्षण तथा उपचार की सुविधा प्रदान की गई है। स्थानीय निधियों का समझदारी से उपयोग, सस्ती जेनेरिक दवाएँ और मौजूदा स्वास्थ्य कार्यक्रमों ने सेवा के विस्तार में मदद की है। ये सेवाएं अब जिला अस्पतालों से स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रही हैं। यह समावेशी विकास और प्रत्येक नागरिक तक सुविधाएं पहुंचाने तथा 2030 तक हेपेटाइटिस के खतरे को समाप्‍त करने के लक्ष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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