भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने भारत के पूंजी बाजारों की उल्लेखनीय मजबूती और व्यापक विस्तार पर विशेष बल दिया है। आज आयोजित ग्यारहवें जेपी मॉर्गन इंडिया सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेबी प्रमुख ने कहा कि गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियों और खंडित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार शानदार प्रगति कर रही है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पूंजी पारिस्थितिकी तंत्र का संक्षिप्त विवरण देते हुए अध्यक्ष ने कहा कि भारत के इक्विटी बाजार का बाजार पूंजीकरण आज लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में इक्विटी और ऋण निर्गमन के माध्यम से 100 ट्रिलियन रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई है। श्री पांडे ने कहा कि यह गति चालू वित्त वर्ष में भी जारी है। इसमें अब तक प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकशों – आईपीओ के माध्यम से लगभग 600 अरब रुपये जुटाए गए हैं, जिसमें से 55 प्रतिशत नई पूंजी सीधे कंपनियों में प्रवाहित हुई है। श्री पांडे ने कहा कि आज कॉर्पोरेट बॉन्डों का बकाया मूल्य भी बढ़कर लगभग 61 ट्रिलियन रुपये हो गया है।
जन भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए श्री पांडे ने घोषणा की कि भारत में अब लगभग 14 करोड़ 90 लाख अद्वितीय प्रतिभूति बाजार निवेशक हैं। घरेलू बचत में वृद्धि के कारण, म्यूचुअल फंड की संपत्ति पांच वर्षों में लगभग तीन गुना बढ़कर 37 ट्रिलियन रुपये से 87 ट्रिलियन रुपये हो गई है।
अंतर्राष्ट्रीय पूंजी को लेकर सेबी अध्यक्ष ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने हुए हैं, जिनके पास लगभग 818 बिलियन डॉलर की संपत्ति अभिरक्षित है।
नियामक सुधारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्री पांडे ने पुष्टि की कि सेबी की प्राथमिकता अनावश्यक बाधाओं को कम करना और विश्वास को केंद्र में रखते हुए प्रौद्योगिकी का बुद्धिमानी से उपयोग करना है। उन्होंने SWAGAT-FI ढांचे का उल्लेख किया, जिसने इस वर्ष जून से दो सौ से अधिक विश्वसनीय विदेशी निवेशकों के डिजिटल ऑनबोर्डिंग को गति प्रदान की है। सेबी ने डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कॉर्पोरेट बॉन्डों के टोकनाइजेशन के लिए एक प्रायोगिक परियोजना डीमैट 2.0 भी शुभारंभ किया है।
भविष्य की योजनाओं को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि सेबी नए ढांचों पर परामर्श कर रहा है। इसमें निवेशकों को क्रेडिट जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर और बाजार की मजबूती को बढ़ाने के लिए मजबूत साइबर-सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल हैं।