उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि संस्कृत वह स्वर्णिम सूत्र है, जो भारत की सभी भाषाओं को जोड़ता है। वे आज नई दिल्ली में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारत की हर भाषा समृद्ध है और सभी भाषाओं ने देश की संस्कृति को समृद्ध करने में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत सहित अन्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष बल देकर इस सोच को और मजबूत किया है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि विज्ञान, साहित्य और दर्शन के क्षेत्र में संस्कृत का गौरवपूर्ण स्थान रहा है। श्री राधाकृष्णन ने बताया कि आज भी भारत के अलावा नेपाल, तिब्बत और चीन जैसे देशों में संस्कृत की दुर्लभ पांडुलिपियां मिलती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ज्ञान भारतम पहल की शुरुआत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि भारत अपनी समृद्ध परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय भाषाओं और परंपराओं को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है। डॉ. मजूमदार ने तेजी से बदलती तकनीक के दौर में विद्यार्थियों से संस्कृत के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक जैसी उभरती तकनीकों को भी समझने का आह्वान किया।