उत्तर प्रदेश सरकार ने आज सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को प्राप्त चंदे में कथित गबन की जांच के लिए लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल – एसआईटी का गठन किया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एसआईटी में पांचवें सदस्य के रूप में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया है। एसआईटी दो सप्ताह के अंदर पहली स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ को राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के सुझाव के बाद 25 जुलाई को जारी अधिसूचना के माध्यम से एसआईटी का गठन किया गया था।
सॉलिसिटर जनरल ने न्यायालय को सूचित किया कि एसआईटी में एक पुलिस उप-महानिरीक्षक रैंक का अधिकारी, एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एक अपर पुलिस अधीक्षक भी शामिल होंगे।
यह पीठ अयोध्या राम मंदिर के लिए प्राप्त दान के गबन के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो-सीबीआई द्वारा जांच और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेखापरीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी।
पिछले सप्ताह न्यायालय ने टिप्पणी की कि अयोध्या राम मंदिर के दान चोरी के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।