अक्टूबर 31, 2026 8:54 अपराह्न

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क के उत्तरी गलियारे को मंजूरी दी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क के उत्तरी गलियारे को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि यह गलियारा दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या को जोड़ेगा और आगे वाराणसी, पटना होते हुए गुवाहाटी तक जाएगा। बनारस रेलवे स्टेशन से वाराणसी और नई दिल्ली के बीच नई ‘वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाने के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में जब यह उत्तरी गलियारा पूरा हो जाएगा, तो दिल्ली से लखनऊ का सफर सिर्फ 2 घंटे 12 मिनट में और दिल्ली से वाराणसी का सफर 3 घंटे 33 मिनट में पूरा हो सकेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से वाराणसी और नई दिल्ली के बीच नई ‘वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस’ को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने इस क्षेत्र में रेल संपर्क को बेहतर बनाने के लिए वाराणसी से जुड़ने वाली दो नई मेमू ट्रेन सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘वंदे भारत स्लीपर’ ट्रेन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यात्रा का एक बेहतरीन साधन साबित होगी। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है। इसमें यात्रियों के साथ-साथ लोको पायलट सहित पूरे चालक दल की सुविधाओं और आराम का विशेष ध्यान रखा गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि ये नई रेल सेवाएं पूर्वांचल क्षेत्र में संपर्क को काफी मजबूत करेंगी।

पूरी तरह से वातानुकूलित और 16 कोच वाली इस नई दिल्ली-वाराणसी ‘वंदे भारत स्लीपर’ ट्रेन में 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसमें एक ‘फर्स्ट एसी, चार एसी 2-टियर और 11 ‘AC 3-टियर’ कोच हैं। दो नई मेमू ट्रेनें वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन को राजातालाब से और प्रयागराज रामबाग को वाराणसी से जोड़ती हैं। इससे पहले, आज रेल मंत्री ने काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों और वाराणसी में निर्माणाधीन ‘नमो सेतु’ का निरीक्षण किया। उन्होंने रेलवे अधिकारियों के साथ इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की। निरीक्षण के बाद, रेल मंत्री ने बताया कि ‘नमो सेतु’ एक संयुक्त रेल और सड़क पुल होगा। उन्होंने कहा कि ‘नमो सेतु’ का निर्माण अगले 100 वर्षों की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इस पुल के ऊपरी हिस्से पर छह-लेन का राजमार्ग होगा और निचले हिस्से पर चार रेल पटरियां होंगी।

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