नीट मुद्दे पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों के हंगामे के बाद संसद के दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।
लोकसभा में आज लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया। पहले स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। यह विधेयक लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रावधान करता है।
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जिनमें दस वर्ष तक की कैद, दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना और दोषी पाए गए अपराधियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर दंड शामिल हैं। मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में प्रत्येक राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के लिए दैनिक सुनवाई हेतु विशेष त्वरित न्यायालय स्थापित करने का प्रावधान है। इसमें यह भी प्रावधान है कि अपराधों की जांच पुलिस स्टेशन में सूचना दर्ज होने की तिथि से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी की जानी चाहिए।
जब सदन तीसरी बार स्थगित होने के बाद शाम 5 बजे फिर से शुरू हुआ, तो पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू करने का प्रयास किया। हालांकि, विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे और नीट मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग करने लगे। श्री टेनेटी ने विपक्षी सदस्यों से चर्चा में भाग लेने का आग्रह किय।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जानबूझकर विधेयक पर बहस नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने इस महत्वपूर्ण विधेयक के लिए छह घंटे का समय दिया है और जरूरत पड़ने पर और समय दिया जा सकता है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से चर्चा में भाग लेने की अपील की क्योंकि यह देश के युवाओं के हित और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
हंगामा जारी रहने पर, पीठासीन अधिकारी ने सदन को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले, आज सवेरे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ओम बिरला ने 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले भारतीय भारोत्तोलकों मीराबाई चानू, चानंबम ऋषिकांत सिंह, राजा मुथुपांडी और पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार को बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों, उनके कोचों और टीम इंडिया के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान अन्य विषय नहीं उठाए जा सकते। उन्होंने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और उसकी गरिमा बनाए रखने की अपील की। अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि सदन की परंपराओं और मर्यादा का उल्लंघन करने वाले सदस्यों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इसी मुद्दे पर राज्यसभा को भी कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
शाम 5.15 बजे चौथी बार स्थगन के बाद जब उच्च सदन की बैठक हुई, तो उपसभापति श्री हरिवंश ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू करने का प्रयास किया। लेकिन विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और अपनी मांग पर जोर दिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए विपक्षी दलों के आचरण की निंदा की। उन्होंने कहा कि बार-बार अपील करने के बावजूद कांग्रेस सहयोग नहीं कर रही है। श्री रिजिजू ने कहा कि संसद के बाहर कांग्रेस नेता दावा करते हैं कि उन्हें संसद में बोलने की अनुमति नहीं है, लेकिन जब सरकार उनसे चर्चा में भाग लेने का अनुरोध कर रही है, तो वे ऐसा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है और चर्चा को रोकना उचित नहीं है।
हंगामा जारी रहने पर उपसभापति ने सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।
राज्यसभा में भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष ने फिर हंगामा किया। इसके बाद सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर आवश्यक दस्तावेज और रसायन और उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट सदन में पेश की गई। इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की।