प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से अलग द्विपक्षीय वार्ता में भी शामिल होंगे।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आज दोपहर नई दिल्ली में एक वर्चुअल मीडिया ब्रीफिंग में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि दोनों नेता आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति पुतिन के लिए यूक्रेन के साथ चल रहे युद्ध की स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी देने का भी अवसर होगा।
श्री पेस्कोव ने कहा कि दोनों नेता व्यक्तिगत रूप से एक-दूसरे के संपर्क में हैं और उनके संबंध काफी व्यावहारिक हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेता संवेदनशील मुद्दों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत कर सकते हैं।
भारत और रूस के बीच व्यापार असंतुलन के बारे में पूछे गए सवाल पर श्री पेस्कोव ने कहा कि भारत ने रूस के सामने व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए रूसी कंपनियां भारत से खरीदे जाने वाले अतिरिक्त उत्पादों और भारत में शुरू की जा सकने वाली संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएं तलाश रही हैं।
भारत द्वारा रूस से ऊर्जा आयात के बारे में श्री पेस्कोव ने कहा कि हर महीने नया रिकॉर्ड बन रहा है। हालांकि, उन्होंने इसके सटीक आंकड़े बताने से इनकार किया। उन्होंने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों को अस्वीकार्य और गैर-कानूनी बताया।
श्री पेस्कोव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध लगाने और दूसरे देशों या तीसरे पक्षों को अन्य देशों के साथ व्यापार करने पर धमकी देना गैर-कानूनी है।
ब्रिक्स के बारे में क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि यह संगठन किसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स, सदस्य देशों और उनके राष्ट्रीय हितों के लिए है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में सहयोग आपसी विश्वास, सम्मान, लाभ और व्यापार पर आधारित है और ये सभी सिद्धांत सदस्य देशों द्वारा साझा किए जाते हैं।
श्री पेस्कोव ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एआई प्रमुख मुद्दों में शामिल होगी। उन्होंने कहा कि रूस वैश्विक बहुमत में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।