सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे ट्रांसफर की गई राशि कितनी भी हो। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि छोटे व्यापारियों के लिए शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट-MDR ढांचे के तहत आने वाले लेनदेन के साथ-साथ व्यापारियों को 2000 रुपये तक, किए जाने वाले भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप सभी व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन का लगभग 96% हिस्सा प्रभावित नहीं होगा। एमडीआर केवल 2000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया-NPCI द्वारा वसूला जाने वाला कोई शुल्क है। इसे यूपीआई के संचालन और निरंतर विस्तार में मदद के लिए बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाताओं के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाता है।
एन.पी.सी.आई. ने कहा है कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई को मुफ्त रखते हुए, अगले महीने की 15 तारीख से चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर एक संशोधित यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट ढांचा लागू किया गया है। हमारे संवाददाता ने बताया है कि कुल एमडीआर संग्रह के 5% योगदान के साथ छोटे व्यापारियों द्वारा यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित कोष स्थापित किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई संचालन समिति द्वारा लागू दरों, परिचालन व्यवस्थाओं और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर विस्तृत चर्चा के बाद, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत एमडीआर ढांचा पेश किया गया है। इस ढांचे का उद्देश्य व्यक्तियों के लिए भुगतान को मुफ्त रखने और छोटे व्यापारियों की रक्षा करते हुए यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करना है।