राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों की वैज्ञानिक पहचान और अधिसूचना हेतु एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान, मूल्यांकन और अधिसूचना के लिए एक समान, पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ प्रक्रिया को सुगम बनाना है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत विश्व के सबसे अधिक जैव विविधता वाले देशों में से एक है, जहां पौधों, जानवरों और पारिस्थितिक तंत्रों की समृद्ध विविधता पाई जाती है। हालांकि, पर्यावरण के क्षरण, अत्यधिक दोहन, प्रदूषण, आक्रामक विदेशी प्रजातियों और जलवायु परिवर्तन के कारण प्रजातियां संकटग्रस्त होती जा रही हैं। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं की सुरक्षा और भावी पीढ़ियों के लिए जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए इन प्रजातियों का संरक्षण आवश्यक है।
मानक संचालन प्रक्रिया को राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान करने और अनुशंसा करने में सहायता के लिए विकसित किया गया है। मानक परिचालन प्रक्रिया सर्वोत्तम उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों, क्षेत्र-आधारित आकलन और पारंपरिक ज्ञान के उपयोग को बढ़ावा देती है। यह स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, शैक्षणिक संस्थानों और विषय विशेषज्ञों की भागीदारी भी सुनिश्चित करती है।