म्यांमा के राष्ट्रपति ऊ मिन आऊँ लाइन् ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आश्वासन दिया है कि भारत के खिलाफ म्यांमा की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच कल नई दिल्ली में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और संपर्क बढ़ाने के उपायों पर विचार विमर्श हुआ। श्री आऊं लाइन् पांच दिन की भारत यात्रा पर हैं। बाचतीत के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने संवाददाताओं को बताया कि म्यांमा के राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ म्यांमा की धरती का इस्तेमाल नहीं होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमा की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत का समर्थन दोहराया। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमा से पूर्वोत्तर में संचालित आतंकी गुटों का मुद्दा उठाया।
दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से व्यापार और आर्थिक संबंध, रक्षा और सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहयोग और क्षेत्रीय स्थिति पर बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया। श्री मिसरी ने कहा कि म्यांमा के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से परस्पर और क्षेत्रीय हित में काम करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई है। म्यांमा भारत का रणनीतिक पडोसी देश है और इसकी 1640 किलोमीटर लंबी सीमा नागालैंड और मणिपुर सहित भारत के कई पूर्वोंत्तर राज्यों से लगी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने भी श्री आऊँ लाइन् से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श किया।
म्यांमा के राष्ट्रपति के साथ कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत प्रमुखों का शिष्टमंडल भी भारत आया है। श्री आऊँ लाइन् व्यापार और उद्योग जगत से बातचीत और स्थल भ्रमण के लिए आज मुंबई जाएंगे।