अगस्त 3, 2026 9:07 अपराह्न

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लोकसभा में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने वाला विधेयक पारित

लोकसभा ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में और संशोधन करके सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्य 33 से बढ़ाकर 37 करना है। यह संख्‍या मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्‍त है। इस वर्ष मई में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था।
 
दूसरे स्थगन के बाद सदन की बैठक फिर शुरू होने पर केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सर्वोच्च न्यायालय-न्यायाधीशों की संख्या संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण का मंत्र प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि यह विधेयक न्यायिक क्षेत्र में चल रही सुधार प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। श्री मेघवाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और न्यायिक प्रणाली को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम न्यायिक क्षमता को और मजबूत करेगा, मामलों के प्रभावी निपटान में तेजी लाएगा और नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
 
हमारे संवाददाता ने बताया है कि इस वर्ष पहली जनवरी तक, सर्वोच्च न्यायालय में 92 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। 2019 से 34 न्यायाधीशों की लगभग पूरी स्वीकृत क्षमता पर काम करने के बावजूद, सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष 65 हजार से अधिक मामलों के निपटान के मुकाबले 75 हजार 410 नए मामले दर्ज किए। मामलों की संख्‍या और निपटान के बीच लगातार बढ़ता अंतराल, विशेषकर पुराने लंबित मामलों और बड़ी पीठों द्वारा निर्णय की आवश्यकता वाले मामलों के संबंध में, मामलों के प्रबंधन की निरंतर चुनौती को दर्शाता है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के निपटारे के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना सबसे अत्यावश्यक और व्यावहारिक समाधानों में से एक है।
 
इससे पहले, पहले स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने विपक्ष के हंगामे के बीच विधायी कार्यवाही शुरू करने का प्रयास किया।
 
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान को एक व्यापक वैधानिक ढांचा प्रदान करना है, ताकि यह सांख्यिकी विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त कर सके।
 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 पेश किया। इसका उद्देश्य बैंकर्स बुक्स से संबंधित साक्ष्यों के लिए कानून बनाना और इसे समकालीन डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं के अनुरूप बनाना है।
विपक्षी सदस्य नीट मुद्दे पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगने के लिए सदन के बीचो बीच पहुंच गए। पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर तख्तियां और बैनर लाना उचित नहीं है और सदस्यों को संसदीय मर्यादा का सम्मान करना चाहिए। हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
 
लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने ग्लासगो में आयोजित 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। श्री बिरला ने कहा कि भारत की महिला खिलाड़ियों ने असाधारण प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन करते हुए आठ स्वर्ण पदक और कुल 16 पदक जीते। उन्होंने कहा कि यह उल्लेखनीय प्रदर्शन देश के लाखों युवाओं और खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा।
 
अध्‍यक्ष ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों का अगला संस्करण 2030 में अहमदाबाद, गुजरात में आयोजित किया जाएगा। श्री बिरला ने कहा कि कल हुए समापन समारोह के बाद राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी आधिकारिक तौर पर भारत को सौंप दी गई है।
 
इसके बाद, श्री बिरला ने प्रश्नकाल शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। श्री बिरला ने कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा जानबूझकर किए गए व्यवधान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देने का आग्रह किया। हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
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