सितम्बर 18, 2026 5:31 अपराह्न

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भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है: डॉ. एल. मुरुगन

सूचना और प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज कहा कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि विचारों, कल्पना, संस्कृति, नवाचार और बौद्धिक संपदा द्वारा संचालित हो रही है। डॉ. मुरुगन हरियाणा के सोनीपत में कानून, नीति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। यह संगोष्ठी ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में जिंदल नीति सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित की गई थी।
 
डॉ. मुरुगन ने कहा कि फिल्म, संगीत, गेमिंग, एनिमेशन, डिजाइन, प्रकाशन, विज्ञापन और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्र रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक जीडीपी में 3 दशमलव एक प्रतिशत और वैश्विक रोजगार में 6 दशमलव दो प्रतिशत का योगदान देती है। उन्होंने कहा कि लगभग 57 मिलियन भारतीय पहले से ही सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यों में लगे हुए हैं। भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र का मूल्य लगभग 2 दशमलव पांच ट्रिलियन रुपये है।
 
डॉ. मुरुगन ने कहा कि एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स – एवीजीसी क्षेत्र को वर्ष 2030 तक लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी। सरकार भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान के माध्‍यम से 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी क्रिएटर लैब स्थापित करने की योजना बना रही है। डॉ. मुरुगन ने कॉपीराइट संरक्षण, रचनाकारों के लिए उचित मुआवजे और एआई के जिम्मेदार उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं से 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में अपने विचारों और कौशल का योगदान देने का आह्वान किया। 
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