रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत किसी अन्य देश की भूमि पर कब्जा करने की इच्छा नहीं रखता है, लेकिन खतरे की स्थिति में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करेगा। नई दिल्ली में एक मीडिया हाउस द्वारा आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक स्थिरता और शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं करेगा।
श्री सिंह ने कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी देश के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी राष्ट्र के लिए रणनीतिक फायदा नहीं हो सकता है। जिन देशों से आतंकवादियों को शरण और समर्थन मिलता है, उन्हें इस बारे में सख्त संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई पड़ोसी देश आतंकवाद का समर्थन करना जारी रखता है, तो भारत को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में राष्ट्रीय एकता पर बल देते हुए, श्री सिंह ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से धर्म, जाति, पंथ, भाषा, क्षेत्र और अन्य पहचानों पर आधारित विभाजनों और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया।
रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 में मात्र 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38 हजार 424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि पूंजी अधिग्रहण बजट का लगभग 75 प्रतिशत, घरेलू रक्षा उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना युद्ध जैसे क्षेत्रों से परे भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं को विकसित आवश्यकता है।