वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को डेटा सेंटर्स के लिए एक बेहद आकर्षक और मजबूत गंतव्य के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा है कि भारत इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए जापानी कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है, और देश को बड़े वैश्विक निवेशकों से दो सौ अरब अमरीकी डॉलर के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं।
तोक्यो में जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्री अकाजावा रियोसेई के साथ हुई बैठक में श्री गोयल ने कहा कि भारत-जापान साझेदारी को चार मुख्य स्तंभों-व्यापार में वृद्धि, तकनीकी सहयोग को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना और पर्यटन को बढ़ावा देना-के आस-पास केंद्रित किया जा सकता है।
इससे पहले, तोक्यो में सेमीकंडक्टर और ए.आई. क्षेत्रों की जापान की कंपनियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने एक बड़े सुधार की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार एक ऐसे विशेष ढांचे पर काम कर रही है जिसके तहत भारत में उत्पादन इकाई लगाने वाली उच्च तकनीक कंपनियों को आवश्यक उपकरणों और कलपुर्जों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के अनिवार्य प्रमाणन से छूट दी जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर की मांग वर्ष 2032 तक 150 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।श्री गोयल ने जापान के प्रमुख वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के साथ भी दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने पिछले वर्ष 7.7 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है और देश वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।