भारत ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में की गई टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है। नई दिल्ली में आज संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी बाहरी पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
आई.बी.एस.ए. के संयुक्त बयान पर श्री जायसवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई।
विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर की सीमा पार आतंकवाद संबंधी टिप्पणी पर श्री जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
अमरीका के शत प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के विषय पर श्री जायसवाल ने कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में नई दिल्ली में अमरीकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि बैठक में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। श्री जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध संबंधी कानून के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया।
फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों के बारे में श्री जायसवाल ने बताया कि वहां भारतीय ध्वज वाले 6 वाणिज्यिक जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं, क्षेत्र में संचालित विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर साढ़े चार हजार से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं। श्री जायसवाल ने कहा कि जहाजरानी मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है और सभी भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से जुड़े सवाल पर श्री जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी आयोग है और नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर इसी आयोग के माध्यम से चर्चा की जाएगी। उन्होंने बताया कि तकनीकी स्तर पर गंगा जल संधि को लेकर बैठकें जारी हैं।