भारत ने अवैध रूप से गठित मध्यस्थता न्यायालय (सीओए) के सिंधु जल संधि पर हालिया तथाकथित फैसले को खारिज कर दिया है। भारत इस न्यायालय के पहले के भी सभी निर्णयों को सख्ती से अस्वीकार कर चुका है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तथाकथित सीओए ने कल अधिकतम जल भंडारण क्षेत्र से संबंधित एक फैसला जारी किया था। उन्होंने कहा कि इसके द्वारा जारी कोई भी कार्यवाही, फैसला या निर्णय अमान्य है। श्री जायसवाल ने कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय अभी भी लागू है।
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच सितंबर 1960 में हस्ताक्षर किए गए थे। यह सिंधु नदी के जल के बंटवारे और उपयोग को नियंत्रित करती है। भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित कर दिया था।