इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज कहा कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया 2026 में एक अनौपचारिक वार्ता में भाग लेते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि बौद्धिक संपदा की सुरक्षा से लेकर वैश्विक कंपनियों को भारत में संपूर्ण उत्पाद डिजाइन करने में सक्षम बनाने तक, सेमीकंडक्टर उद्योग में विश्वास अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री वैष्णव ने कहा कि भारत ने दस वर्षों में 85 हजार सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि चार वर्षों में 70 हजार इंजीनियरों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि देश भर के छात्र अब चिप्स डिजाइन और टेप आउट कर रहे हैं। लगभग 400 इंजीनियरिंग कॉलेजों के पास उद्योग-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं।
श्री वैष्णव ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट 20 वर्षीय रोडमैप की आवश्यकता है। भारत का दृष्टिकोण सतत और दीर्घकालिक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना है। उन्होंने कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें चिप डिजाइन, सामग्री, निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग, अनुसंधान और विकास तथा भंडारण शामिल हैं।
श्री वैष्णव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सेमीकॉन इंडिया में एक ही देश की लगभग 30 कंपनियां विभिन्न पवेलियनों में भाग ले रही हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र से एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
श्री वैष्णव की उपस्थिति में सेमीकॉन इंडिया 2026 में कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ और नए सहयोगों की घोषणा की गई। इन पहलों का उद्देश्य भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। श्री वैष्णव और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी इस कार्यक्रम में ओडिशा पवेलियन का उद्घाटन किया।