गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय आतंकरोधी नीति और रणनीति-प्रहार सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन में प्रहार के सात स्तंभों पर चर्चा हुई। इनमें आतंकवाद की रोकथाम, उससे निपटने की कार्रवाई, आंतरिक क्षमताओं का एकीकरण, मानवाधिकार, आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में समन्वय तथा पूरे समाज की भागीदारी से पुनर्प्राप्ति और लचीलापन शामिल है।
इस अवसर पर श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच सरकार 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाई है।
श्री शाह ने कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय से सीमा पार हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल शहजाद भट्टी नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। सौ से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 15 राज्यों में 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां-रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के अंतर्गत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
गृह मंत्री ने आतंकवादी घटनाओं का लगातार विश्लेषण कर प्रहार रणनीति को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अगले दस वर्षों के लिए एक मजबूत और ठोस प्रहार तंत्र विकसित करने की बात कही।
श्री शाह ने प्रहार के सिद्धांतों को थाना स्तर तक पहुंचाने और आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए हर स्तर पर सक्रिय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई, जिससे कार्रवाई में किसी तरह की देरी न हो।
श्री शाह ने नया प्रत्यर्पण पोर्टल भी शुरू किया। यह विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने के प्रयासों में समन्वय और तेजी लाने में मदद करेगा। उन्होंने राज्य पुलिस बलों से केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए समर्पित टीमें गठित करने का आग्रह किया।