गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि बिम्सटेक देशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस क्षेत्र का कोई भी हिस्सा आतंकवादी नेटवर्क को पनाह लेने, सदस्य बनाने, ट्रेनिंग लेने, फंड जुटाने या पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियां करने का अवसर न दे। नई दिल्ली में बिम्सटेक गृह मंत्रियों की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री शाह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कतई बर्दाश्त न करने की नीति है। गृह मंत्री ने बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग के पांच अहम क्षेत्रों पर बल दिया, जिनमें ड्रग्स पर नियंत्रण, आतंकवाद-रोधी और कानूनी सहयोग, भागे हुए अपराधियों की वापसी, साइबर-सुरक्षा और साइबर-क्राइम की जांच, और संस्थागत सहयोग व क्षमता निर्माण शामिल हैं।
श्री शाह ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी ‘मौत की तस्करी’ का एक रूप है और इसमें कुछ भी सुनहरा नहीं है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सिर्फ ड्रग्स का व्यापार नहीं है, बल्कि युवाओं की ज़िंदगी, समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है। श्री शाह ने कहा कि ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र को साथ लेकर चलने वाला नज़रिया अपनाना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि एक सदस्य देश की सुरक्षा पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को मज़बूत करती है। उन्होंने कहा कि इसी सिद्धांत को मानते हुए भारत बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है।
श्री शाह ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा के लिए एक ज़रूरी मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत ‘विश्वमित्र’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है। श्री शाह ने कहा कि गृह मंत्रियों के तौर पर उनकी यह ज़िम्मेदारी है कि वे बिम्सटेक को समावेशी विकास और सुरक्षा का मॉडल बनाएं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, सीमा-पार संगठित अपराध और अवैध ड्रग्स तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में सहयोग के लिए बिम्सटेक कन्वेंशन को पूरी तरह लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।