हरियाणा सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पहली अक्टूबर से बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के ईंधन ना देने की नीति लागू करेगी। इसका उद्देश्य क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने ये निर्णय लिया।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजशेखर वुंद्रू ने बताया कि 2026 के दौरान गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत, करनाल और रोहतक में 925 इलेक्ट्रिक बस भी शुरू की जाएंगी। इनमें से 70 बस पहले से ही परिचालन में हैं, जबकि 385 और बसों के लिए प्रकिया जारी है।
उन्होंने बताया कि 30 सितंबर से पहले 23 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र शुरू होंगे। इसके बाद इनकी कुल संख्या 45 हो जाएगी। ईंधन भरने से पहले प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के सभी 2780 पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली भी स्थापित की जा रही है। हरियाणा में 2883 पुराने वाहनों को जब्त किया गया है, 2 हजार से अधिकव वाहनों को स्क्रैप किया गया है और स्वैच्छिक रूप वाहनों को स्क्रैप करने के लिए 6 हजार से अधिक अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं।