सरकार ने सोशल मीडिया मंचों को अपने प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही ऐसी सूचनाओं के संबंध में अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था या सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका हो।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा सार्वजनिक घटनाओं और घटनाक्रमों के संबंध में विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर फर्जी, भ्रामक, छेड़छाड़ की गई और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई सामग्री प्रसारित की जा रही है।
मंत्रालय की सलाह के अनुसार, सोशल मीडिया मंचों को पुरानी तस्वीरों और वीडियो को मौजूदा घटनाओं के रूप में प्रस्तुत किए जाने, डिजिटल रूप से बदली गई या एआई से तैयार की गई ऑडियो-विजुअल सामग्री, सरकारी अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पहचान बनाने तथा हिंसा या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को भड़काने वाली सामग्री पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंचों को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत निर्धारित श्रेणियों में आने वाली गैरकानूनी सामग्री के प्रसार की पहचान करने, उसे रोकने और बढ़ावा न देने के लिए उचित कदम उठाने की सलाह भी दी है। सार्वजनिक व्यवस्था पर असर डालने की आशंका वाली सामग्री के संबंध में अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिली शिकायतों और सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
सोशल मीडिया मंचों को छेड़छाड़ की गई एआई से तैयार की गई या भ्रामक सामग्री की पहचान करने और उस पर उचित लेबल लगाने के साथ उसका संदर्भ स्पष्ट करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से ऐसी सामग्री के मामले में सतर्कता बरतने को कहा गया है, जिसे किसी मौजूदा घटना का दृश्य बताकर साझा किया जा रहा हो।
मंत्रालय ने मंचों से उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने के लिए भी कहा है, ताकि वे किसी सूचना को साझा करने या आगे भेजने से पहले उसकी प्रामाणिकता, स्रोत और तारीख की जांच करें। साथ ही, लागू कानून और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंचों को अपने निगरानी, शिकायतों को आगे बढ़ाने और शिकायत निवारण तंत्र की समीक्षा कर उन्हें मजबूत बनाने की सलाह भी दी है। इसका उद्देश्य ऐसी सामग्री पर शीघ्र कार्रवाई करना है, जिससे व्यापक भ्रम, घबराहट, हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होने की आशंका हो।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस परामर्श का उद्देश्य कानून के दायरे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैध सार्वजनिक चर्चा का सम्मान करते हुए सूचनाओं के जिम्मेदार प्रसार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना है।