अगस्त 5, 2026 9:45 अपराह्न

printer

भारत ने ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अंतर्गत श्रीलंका के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराई

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज श्रीलंका की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘महासागर’ दृष्टिकोण के अंतर्गत श्रीलंका के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की।

विदेश सचिव के रूप में श्रीलंका की यह उनकी पहली यात्रा थी। विदेश सचिव ने इस यात्रा के दौरान श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायका, प्रधानमंत्री डॉक्टर हरिणी अमरासुरिया और विदेश मंत्री विजयथा हेराथ से मुलाकात की। उन्होंने विदेश मामलों, विदेश रोजगार और पर्यटन सचिव अरुणी रणराजा से भी बातचीत की। विदेश सचिव ने विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा से भी मुलाकात की तथा श्रीलंकाई तमिल और भारतीय मूल के तमिल समुदाय के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों पक्षों ने भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय मुद्दों और परियोजनाओं के संबंध में चल रहे सहयोग की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने चक्रवात दित्वाह के बाद घोषित 45 करोड़ डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज सहित विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने रेलवे परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ डॉलर तथा पशुधन और अन्य प्राथमिकता वाली आवश्यकताओं के लिए 10 करोड़ डॉलर के भारतीय रुपये में दिये जाने वाले दो ऋणों के संबंध में हुए समझौतों का स्वागत किया।

श्रीलंका के राष्ट्रपति की उपस्थिति में श्रीलंका सरकार के वित्त सचिव और भारत के उच्चायुक्त ने भारतीय निर्यात-आयात बैंक और श्रीलंका के वित्त मंत्रालय के बीच हुए समझौतों का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों ने यह भी उल्लेख किया कि दित्वाह पुनर्निर्माण पैकेज के अंतर्गत क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण और स्थायी पुलों का निर्माण शीघ्र ही शुरू होगा जिसके लिए 10 करोड़ डॉलर का अनुदान दिया गया है।

दोनों पक्षों ने विद्युत ग्रिडों को आपस में जोड़ने की परियोजना, संपूर सौर ऊर्जा परियोजना और त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने सहित ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने के तौर-तरीकों पर भी चर्चा की। उन्होंने श्रीलंका विशिष्ट डिजिटल पहचान परियोजना के कार्यान्वयन के लिए निविदा प्रक्रिया को यथाशीघ्र पूरा करने की दिशा में काम करने पर भी सहमति व्यक्त की।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कंकेसंथुराई बंदरगाह परियोजना के पुनर्वास और आधुनिकीकरण पर समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने के लिए जल्द से जल्द बातचीत शुरू की जाए। यह परियोजना 6 करोड़ 15 लाख डॉलर के अनुदान के अंतर्गत कार्यान्वित की जानी है।

सर्वाधिक पठित
सम्पूर्ण जानकारी arrow-right

कोई पोस्ट नहीं मिला