वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। सुश्री सीतारामन ने आज मुंबई में लघु उद्योग विकास बैंक की 37वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और ग्रामीण उद्योगों के आधुनिकीकरण में तेजी लाने के उद्देश्य से कई पोर्टल तथा पहलों का शुभारंभ किया।
सुश्री सीतारामन ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू विकास को सुरक्षित रखने के लिए भारत की नीतिगत प्रतिक्रिया को सावधानीपूर्वक संतुलित किया गया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में हालिया कटौती से राजस्व पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये का भार पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के अतिरिक्त उर्वरक की कीमतें अकल्पनीय स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि सोने की ऊंची कीमतें भी चुनौतियां पेश कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र को आठ लाख करोड़ रुपये के भुगतान में हो रही देरी, उनकी कामकाजी पूंजी और विकास की संभावनाओं पर असर डाल रही है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इस क्षेत्र के उद्ययमों को भुगतान तय 45 दिनों की अवधि के भीतर ही कर दिया जाए।