पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज पंचकूला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर ‘संकट से उबरना – भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। वन और वन्यजीव संरक्षण मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन और वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी तथा पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में हरियाणा के वन और वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने भी हिस्सा लिया।
अपने संबोधन में श्री भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण समग्र पारिस्थितिकी तंत्र-उन्मुख संरक्षण मॉडल पर आधारित है और किसी विशेष प्रजाति तक सीमित नहीं है।
उन्होंने गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों के निर्माण और वन्य जीवन में प्रजातियों के संरक्षण में सहायता हेतु तकनीकी क्षमता के विकास का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक से भारतीय गिद्धों की आबादी में तेजी से आई गिरावट का मुख्य कारण उनकी खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और गिद्धों द्वारा खाए जाने वाले जानवरों के लिए दर्द निवारक दवाओं का उपयोग है।
श्री यादव ने कुशल सफाईकर्मी के रूप में गिद्धों की महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका का उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री ने पिंजौर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र का दौरा भी किया और वहां गिद्ध संरक्षण से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने ‘स्टोरी ऑफ जटायु: सेविंग इंडियाज वल्चर’ नामक कॉफी टेबल पुस्तक का विमोचन भी किया गया। साथ ही गिद्ध संरक्षण विषय पर आयोजित ऑनलाइन चित्रकला और डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।