अप्रैल 28, 2026 2:19 अपराह्न

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्‍त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को खारिज करने की बात कही। किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित सीमा पार आतंकवाद परिषद – एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक में उन्होंने कहा कि किसी भी देश द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद, जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है, को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि दोहरे मापदंड के लिए कोई स्‍थान नहीं है। पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के पीड़ितों को याद करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपना दृढ़ संकल्प प्रदर्शित किया कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायोचित दंड से अछूते नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती और राष्ट्रों को इस खतरे के खिलाफ एक दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।
 
रक्षा मंत्री ने आज एससीओ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक दृष्टिकोण में भिन्‍नता है और देश तेजी से आत्‍म केंद्रित होते जा रहे हैं ऐसे में एससीओ विश्व की कुछ सबसे प्राचीन सभ्यताओं का घर है और सबको एकजुट किए हुए है। उन्‍होंने कहा कि हमारा क्षेत्र प्राचीन व्यापार मार्गों की उद्यमशीलता की भावना और हमारे लोगों की वीरता और साहस को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को सहायता देने, शरण देने और सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में एससीओ को संकोच नहीं करना चाहिए।
 
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे क्षेत्र के शांतिपूर्ण भविष्य के लिए एससीओ को अंतरराष्ट्रीय मानकों के निरंतर संरक्षक के रूप में कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज की चर्चा से साझा सुरक्षा चुनौतियों की समझ और गहरी होगी और रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों का पता चलेगा। श्री सिंह ने दोहराया कि भारत एससीओ के जनादेश के कार्यान्वयन में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समानता, आपसी सम्मान और गहरी समझ के आधार पर एससीओ सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास की भी वकालत की।