सितम्बर 5, 2026 6:11 अपराह्न

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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्वस्थ असहमति और विचार-विमर्श की संस्कृति के महत्व पर दिया जोर

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्वस्थ असहमति और विचार-विमर्श की संस्कृति के महत्व पर जोर दिया। नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स मुख्य न्यायाधीश मंच के अंतर्गत, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित किया। उन्होंने समय पर और उचित न्‍याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि नालंदा विश्वविद्यालय एक समय में सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक केंद्र हुआ करता था, जहाँ विश्व भर के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को बिना किसी भेदभाव या बाधा के प्रवेश दिया जाता था। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को भी जीवंत नालंदा विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाना चाहिए। आज के सम्मेलन को ब्राजील के सर्वोच्च संघीय न्यायालय के अध्यक्ष लुइज़ एडसन फाचिन और चीन के मुख्य न्यायाधीश झांग चुन सहित अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।

मध्यस्थता पर एक सत्र के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस बात पर बल दिया कि जैसे-जैसे देशों के बीच व्यापार बढ़ता है, व्यवसायों को ऐसे विवाद-समाधान तंत्रों की आवश्यकता होगी जो विभिन्न कानूनी और वाणिज्यिक संस्कृतियों में कुशल, विश्वसनीय और व्यावहारिक हों। उन्होंने मध्यस्थता संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने, पेशेवर प्रशिक्षण, बहुभाषी क्षमता और न्यायाधीशों, मध्यस्थों, वकीलों और व्यवसायों के बीच संवाद को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में अपनी न्याय प्रणाली के केंद्र में मध्यस्थता को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। उन्होंने इस बात का उल्‍लेख किया कि राष्ट्रव्यापी पहल, राष्ट्र के लिए मध्यस्थता, ने मध्यस्थता को सार्वजनिक और संस्थागत स्तर पर अधिक महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। मुख्‍य न्‍यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि संवाद कायम रह सके, व्यापार जारी रह सके और ब्रिक्स के सदस्य देशों और भागीदार देशों के बीच विश्वास बढ़ सके।

आज जिन चार महत्वपूर्ण सत्रों में चर्चा हुई, उनमें मध्यस्थता और अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक विवाद, मध्यस्थता निर्णयों का सीमा पार प्रवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और न्यायपालिका तथा न्यायिक नेतृत्व और सतत विकास शामिल हैं। इस मंच ने ब्रिक्स सदस्य देशों और भागीदार देशों के बीच उभरते कानूनी और संस्थागत मुद्दों पर घनिष्ठ न्यायिक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और गहन सहयोग को सक्षम बनाया।

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